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ज़माने ताज़ी के

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल ढ़ूंढता है अब भी,वो ज़माने माज़ी के।
        
                                                    
                            
कौन गुनगुना रहा है , अब तराने माज़ी के।।

सब देख रहे हैं मुझको, अजनबी की तरह।
क्यूं पहचानते नहीं, मुझे ठिकाने माज़ी के।।
-यूनुस खान
7 घंटे पहले
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