दिल ढ़ूंढता है अब भी,वो ज़माने माज़ी के।
कौन गुनगुना रहा है , अब तराने माज़ी के।।
सब देख रहे हैं मुझको, अजनबी की तरह।
क्यूं पहचानते नहीं, मुझे ठिकाने माज़ी के।।
-यूनुस खान