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खस-ओ-खार

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसकी नजर में,मैं कुछ नहीं खस-ओ-खार के सिवा।
        
                                                    
                            
राह-ए-उल्फत से हमे क्या मिला, बस हार के सिवा।।

कुरबत की सारी बातें बेमानी लगती हैं अब हमको।
ताल्लुक के नाम पर बचा ही क्या है दरार के सिवा।।

- यूनुस खान
19 घंटे पहले
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