जब भी, कोई ख़त-ओ-पैग़ाम लिखेंगे।
हर सफहे में हम तेरा ही नाम लिखेंगे।।
चिराग तले कोई अंधेरा बचेगा न अब।
हम रोशनी से सुबह-ओ-शाम लिखेंगे।।
-यूनुस खान