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शौक़ से, अश्कों को पानी कहिए।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शौक़ से, अश्कों को पानी कहिए।
        
                                                    
                            
ग़म को हिज़्र की निशानी कहिए।।

वो झोंके जो यूं दर्द बढ़ाते हैं मेरा।
उन्हें, अब हवा की रवानी कहिए।।

मैंने हर बात साफ़गोई से कही है।
इसको चाहे मेरी लंतरानी कहिए।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
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