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गुफ्तगू से मिटा लेते हैं, ये गिले-शिकवे।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खामोशियों के मंज़र, हैं राज़दार घर के।
        
                                                    
                            
सन्नाटों से घिरे हैं, दर-ओ-दीवार घर के।।

गुफ्तगू से मिटा लेते हैं, ये गिले-शिकवे।
उठाना ना मुद्दे, यूं सर-ए-बाज़ार घर के।।
-यूनुस खान
2 सप्ताह पहले
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