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हालात, इतने भी पुरखतर ना थे।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हालात, इतने भी पुरखतर ना थे।
        
                                                    
                            
हम मासूम थे, पर बेख़बर ना थे।।

कली भी थी,फूल भी खिलते थे।
कौन कहता है यहां नजर ना थे।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
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