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आये हैं मेरे क़ातिल,मेरे गमख्वार बनकर।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आये हैं मेरे क़ातिल,मेरे गमख्वार बनकर।
        
                                                    
                            
सांप आस्तीन में छिपे थे,मेरे यार बनकर।।

ताउम्र बेवफाई का किरदार निभाने वाले।
बज़ाहिर खड़े थे,वफ़ा का मजार बनकर।।

उसूल परस्ती जब एक हद से गुज़र गयी।
फिर पेश आयी, यूं दरम्यां दीवार बनकर।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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