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मेरी दीवानगी इस मक़ाम तक पहुंची

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी दीवानगी इस मक़ाम तक पहुंची।
        
                                                    
                            
दर्द की आहें, उसके नाम तक पहुंची।।

लबों की तपिश, देखने वाला ही नहीं।
क्यूं बेसबब ही बात जाम तक पहुंची।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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