लोग कहते हैं कि, देखो गमख्वार आये हैं।
हक़ीक़त ये है,अश्कों के ख़रीदार आये हैं।।
ऐश-ओ-इशरत की, बात करना फजूल है।
मुझको पता है,मेरे हिस्से में खार आये हैं।।
साहिल पे पहुंचने की,दास्तां क्या सुनाऊं।
कदम-कदम पर, राह में मंझधार आये हैं।।
अजनबी भीड़ के चेहरों ने,समझाया हमें।
लिबास बदलकर , यहां किरदार आये हैं।।
वो, जिन्होंने फांसलों को अंज़ाम दिया है।
बनकर,अब कुरबतों के पैरोकार आये हैं।।
-यूनुस खान