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आंगन दुखी हुआ क्यूं ये शम्मा जल गयी।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुस्कान मेरे लबों की, यूं सबको खल गयी।
        
                                                    
                            
बरसों से नासाज़, जो तबियत संभल गयी।।

घर के दर-दरीचों को अंधेरे बहुत पसंद हैं।
आंगन दुखी हुआ क्यूं ये शम्मा जल गयी।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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