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दिन-ब-दिन जवां हो रही खिजां।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां , ये सुरूर-ओ-खुमार के दिन।
        
                                                    
                            
जैसे, किसी के इंतजार के दिन।।

दिन-ब-दिन जवां हो रही खिजां।
यूं वीरान हो रहे हैं बहार के दिन।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
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