हां , ये सुरूर-ओ-खुमार के दिन।
जैसे, किसी के इंतजार के दिन।।
दिन-ब-दिन जवां हो रही खिजां।
यूं वीरान हो रहे हैं बहार के दिन।।
-यूनुस खान
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