विज्ञापन

तन्हाई वाबस्ता है मुद्दतों से हमसे।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम , छोड़कर मयखाने कहां जायें।
        
                                                    
                            
बता दे , मय के दीवाने कहां जायें।।

तन्हाई वाबस्ता है मुद्दतों से हमसे।
अब जुदा होके वीराने कहां जायें।।

जिन्हें अपना बना छोड़ दिया तूने।
जो ऐसे बने,वो बेगाने कहां जायें।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all