विज्ञापन

तुम्हारे खतों के साथ दर्द बांट देता हूं।।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस तरह से, अपनी रातें काट लेता हूं।
        
                                                    
                            
तुम्हारे खतों के साथ दर्द बांट देता हूं।।

मेरे और तन्हाई के दरम्यां जो खाई है।
उस खाई को, मैं खुद ही पाट लेता हूं।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile