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वो,जो आज खुद को यूं खुदा समझते हैं।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस ग़म-ए-हिज़्र से, उबर जायेंगे एक दिन।
        
                                                    
                            
उसूलों की हद से , गुज़र जायेंगे एक दिन।।

अंधेरों से निबाह करना भी,सीख लेंगे हम।
ये ना सोच, अंधेरों से डर जायेंगे एक दिन।।

ऐसा नहीं , कि तमाम उम्र खाली ही रहेंगे।
यकीं है, कि ये जाम भर जायेंगे एक दिन।।

जिन्हें गुरूर है,ऐश-ओ-इशरत पर अपनी।
देखना कि , गुरूर उतर जायेंगे एक दिन।।

वो,जो आज खुद को यूं खुदा समझते हैं।
यकीनन,वो सब भी मर जायेंगे एक दिन।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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