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वो,जो आज खुद को यूं खुदा समझते हैं।

                
                                                         
                            इस ग़म-ए-हिज़्र से, उबर जायेंगे एक दिन।
                                                                 
                            
उसूलों की हद से , गुज़र जायेंगे एक दिन।।

अंधेरों से निबाह करना भी,सीख लेंगे हम।
ये ना सोच, अंधेरों से डर जायेंगे एक दिन।।

ऐसा नहीं , कि तमाम उम्र खाली ही रहेंगे।
यकीं है, कि ये जाम भर जायेंगे एक दिन।।

जिन्हें गुरूर है,ऐश-ओ-इशरत पर अपनी।
देखना कि , गुरूर उतर जायेंगे एक दिन।।

वो,जो आज खुद को यूं खुदा समझते हैं।
यकीनन,वो सब भी मर जायेंगे एक दिन।।
-यूनुस खान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
46 minutes ago

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