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मिलकर इन ख़ामोशियों को ज़बान देते हैं

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिलकर इन ख़ामोशियों को ज़बान देते हैं।
        
                                                    
                            
यूं सहरा के मुसाफ़िर को, सायबान देते हैं।।

एक मुद्दत हुई है परिंदों को कैद हुए घर में।
चलो अब इनके परों को नयी उड़न देते हैं।।
-यूनुस खान
2 महीने पहले
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