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हमें मंझधार , और खुद को किनारा समझता है

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हमें मंझधार , और खुद को किनारा समझता है।
        
                                                    
                            
वो साहिब-ए-असबाब हमें बेसहारा समझता है।।

हम पर थोड़ा दौर-ए-गर्दिश आया तो क्या हुआ।
वो हमें , पैदायशी तकदीर का मारा समझता है।।
-यूनुस खान
3 महीने पहले
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