हमें मंझधार , और खुद को किनारा समझता है।
वो साहिब-ए-असबाब हमें बेसहारा समझता है।।
हम पर थोड़ा दौर-ए-गर्दिश आया तो क्या हुआ।
वो हमें , पैदायशी तकदीर का मारा समझता है।।
-यूनुस खान
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