विज्ञापन

साफ़गोई को वो मेरी अना समझता है

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            साफ़गोई को वो मेरी अना समझता है।
        
                                                    
                            
नादां है, ख़ामोशी को मना समझता है।।

मेरे तसव्वुर में आज भी उभरता है वो।
जबकि वो सब कुछ फना समझता है।।
-यूनुस खान
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile