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साफ़गोई को वो मेरी अना समझता है

                
                                                         
                            साफ़गोई को वो मेरी अना समझता है।
                                                                 
                            
नादां है, ख़ामोशी को मना समझता है।।

मेरे तसव्वुर में आज भी उभरता है वो।
जबकि वो सब कुछ फना समझता है।।
-यूनुस खान
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2 सप्ताह पहले

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