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तेरे तसव्वुर से निकलना,आसान न था

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे तसव्वुर से निकलना,आसान न था।
        
                                                    
                            
राह में गिरकर संभलना,आसान न था।।

तुम हमसफर बने,तो बड़ा अच्छा लगा।
ताउम्र , तन्हा चलना तो आसान न था।।

तेरी आमद के इंतजार में,ये शाम ढली।
वरना यूं दिन का ढलना,आसान न था।।

अहद-ए-वफा ना लेकर, बच गये आप।
वादा करके, यूं बदलना आसान न था।।

जुगनुओं को देखा,तो जल उठे चिराग।
बुझते दियों का जलना, आसान न था।।

सावन बरसा, तो सहरा भी मचल उठा।
ऐसे तपिश का मचलना,आसान न था।।

बागबां की मेहनत , रंग लायी आखिर।
सूखे शजर का फलना, आसान न था।।

हिज़्र से फुर्सत मिली,ख़्वाब देखे हमने।
इस तरह ख़्वाब देखना,आसान न था।।

-यूनुस खान
7 घंटे पहले
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