तेरे तसव्वुर से निकलना,आसान न था।
राह में गिरकर संभलना,आसान न था।।
तुम हमसफर बने,तो बड़ा अच्छा लगा।
ताउम्र , तन्हा चलना तो आसान न था।।
तेरी आमद के इंतजार में,ये शाम ढली।
वरना यूं दिन का ढलना,आसान न था।।
अहद-ए-वफा ना लेकर, बच गये आप।
वादा करके, यूं बदलना आसान न था।।
जुगनुओं को देखा,तो जल उठे चिराग।
बुझते दियों का जलना, आसान न था।।
सावन बरसा, तो सहरा भी मचल उठा।
ऐसे तपिश का मचलना,आसान न था।।
बागबां की मेहनत , रंग लायी आखिर।
सूखे शजर का फलना, आसान न था।।
हिज़्र से फुर्सत मिली,ख़्वाब देखे हमने।
इस तरह ख़्वाब देखना,आसान न था।।
-यूनुस खान