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सूनापन

Voice N

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आशियाना बनाना था जहाँ
        
                                                    
                            
सूनापन वहां पसर गया,
शोर मचाता आता था जो कभी
दबे पाँव गली से गुजर गया।
शुमार करता था जो
अपनी सभी बातों में मुझको
छोड़ जाने का फैसला
बस उसने अपनी तरफ लिया।
मौका परस्ती कहूँ इसको
या नये जमाने का असर
अतरंगी कह दुनिया मेरी
सतरंगी रंगों में जा घुल मिल गया।
'तुम कभी बदल ना जाना' कहता था जो कभी,
रफ्ता रफ्ता ख़ुद ही बदल गया।
अब ना जवाब देता कोई,
ना करता दुआओं में शुमार,
दोस्ती का सबक सिखा के उसने,
दुश्मन सा सुलूक किया।
शोर मचाता आता था जो कभी
दबे पाँव गली से गुजर गया।
-नीरू जैन
6 महीने पहले
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