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रदीफ़-का मौसम आया है

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज सूनी महफिल है खुद से ही बात का मौसम आया है
        
                                                    
                            
ये पलकें भीगी हुई हैं और बरसात का मौसम आया है ।।

कभी उनका ही ख्वाब सजाया था हमने इन आँखों में-
वो ख्वाब भी खो गया है कहीं और रात का मौसम आया है ।।

ऐ चाँद तू जरा मुझको भी अपने इस सफ़र में शामिल कर ले,
अब जन्नत में जाना है खुदा से मुलाकात
का मौसम आया है ।।

इस जुबाँ से अब हर घड़ी बस इक आवाज आती रहेगी,
ये नज़रें झुकी हुई हैं और इश्क में मात का मौसम आया है ।।

रातों में मेरे इस दिल से नींदों में भी अश्क़ बहा करते हैं,
धड़कन ठहरी है किसी की यादों के साथ का मौसम आया है ।।

इन महकती फिज़ाओं में भी केवल उनकी ही चर्चा होती है,
हमने गुल को भुला दिया है पारिजात का मौसम आया है ।।

ये शाम बहुत दर्द भरी है और जिन्दगी भी गैर-सी हो चुकी है
कफन के लिये कपड़े नहीं हैं बिसात का मौसम आया है।।

- विवेक भूषण पाण्डेय

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