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देवभूमि उत्तराखंड

Vishwambhar Sati

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उत्तराखंड भूमि हमारी है,
        
                                                    
                            
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
कस्तूरी मृगों की भीनी खुशबू से,
बांज की जड़ों से निकले शीतल जल से,
जाह्नवी की कक-कल करती जलधारा से,
यमुना जी की मधुर-मृदुल ध्वनि से,
सुगंधित हो उठता है तब वातावरण,
समस्त जीव-जंतु और मानव।
सुंदर-सुखद ये ऋषियों की भूमि है,
उत्तराखंड भूमि हमारी है,
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
ऊँचे पर्वत हिम शिखरों से,
रंग-बिरंगी मखमली बुग्यालों से,
मध्य हिमालयी सुंदर भू-दृश्यों से,
नदी-घाटियों के दृश्य अधिवासों से —
सुंदर-सुखद देवभूमि है।
उत्तराखंड भूमि हमारी है,
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
वन-विहारों में सिंहों की दहाड़ों से,
कलरव करती पक्षियों के मधुर संगीतों से,
राजाजी में मस्त मौला हाथियों के शोर-शराबों से,
दांडों में फुदक-फुदक विचरण करती हिरणियों से,
भाबर के घने जंगलों में नृत्य करती मोरनियों से —
बिखेर देती हैं तब खुशियाँ,
आत्मविभोर के मधुर मिलन की भूमि है।
उत्तराखंड भूमि हमारी है,
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
कैलाश में शिव के डमरू की ‘ॐ’ ध्वनि से,
हिमालय में ऋषियों के वेद मंत्रों से,
नंदा देवी की डोली से निकली जीवन संजीवनी से,
रात्रि प्रहर में विचरण करती ऐड़ी आँछेरी से —
आनंद दायिनी ये तपोभूमि है।
उत्तराखंड भूमि हमारी है,
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
सूर्य की स्वर्णिम किरणें
उषा काल में
हिमालय को स्पर्श करती हैं जब,
छा जाती है लालिमा,
सम्पूर्ण प्रकृति प्रफुल्लित होती है तब।
पशु-पक्षी विचरण करते,
मानो जीवन लौट आया हो,
खुशियों का सागर लाया हो।
सुंदर-सुखद ये ज्ञान की भूमि है।
उत्तराखंड भूमि हमारी है,
सबसे न्यारी, सबसे प्यारी है।
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