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चौखट पर बैठी है शाम

VISHAL YADAV

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गईं तुम जब से,
        
                                                    
                            
न आया चैन न मिला आराम
घबराता है दिल,
न रहा हो तुम्हारा आख़िरी सलाम

पर ये धड़कन!
ये धड़कन मानो कहती है
कि तुम आओगी
तुम ज़रूर आओगी

बस इसी उम्मीद में.......
"चौखट पर बैठी है शाम"

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6 वर्ष पहले
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