इस दिवाली सबको सब कुछ मिल ही जाएगा...
कर्मचारियों को बोनस और उपहार,
बाज़ारों को भीड़ की रौनक,
दुकानदारों को उनके ग्राहक,
बच्चों को पटाखे और फुलझड़ियाँ।
पर शायद नहीं मिलेगा किसानों को उनकी फसल का भुगतान,
नहीं मिलेगी बेरोज़गार युवाओं को नौकरियों की भरमार,
और नहीं मिलेगी बुज़ुर्गों को उनके अकेलेपन से निजात...।