"उम्मीद पर है दुनिया कायम"
उम्मीद पर है दुनिया कायम,
यह वक्त बुरा भी टल जाएगा।
कुछ पल का है देखो यह अंधेरा,
रोशनी में फिर बदल जाएगा।
समय, समय पर है जो भारी,
समय के साथ बदल जाएगा।
उजाला क्षितिज के पार का
फिर जल्द ही निकल आएगा।
उम्मीद का दिया जलाए रखो,
बाकी दिये सब जल जाएगें।
आएगी फिर हिम्मत वापस ,
शांति, धैर्य खुद आ जाएंगें।
स्थिति हो रही बद से बदतर
ज्यों ज्यों बढ़ती मुनाफाखोरी।
अशांति का है बनता माहौल
जब जब होती कालाबाजारी ।
मानवता के दुश्मन जो ठहरे,
हैं शर्मसार करते अवसरवादी।
सबक सिखाने का है मौका
पड़ते जो मानवता पर भारी।
विचलित तो करती हैं मौतें,
पर मानवता जिंदा रहती है।
भाई चारा सौहार्द्र की मिसालें
फेहरिस्त में शामिल रहती हैं।
"गुरू जी"मानव तो है आता
जाता,जिंदा मानवता रहती है।
देश काल और समय परिस्थिति
मिल एक कहानी कहती है।
वीरेंद्र कुमार
नई दिल्ली
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