विज्ञापन

पर्वतों की ऊंचाइयां

Virendra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पर्वतों की ऊंचाइयां
        
                                                    
                            
पर्वतों की ऊँचाइयों ने धाराओं को थामा है,
गिरती हुई सरिताओं को कठिनाइयों से त्यागा है।
सरिताओं की क्या-मलाल की पर्वतों से बैर करे वे,
पर्वत ही तो है, जिसने सरिताओं को प्रेम में बाँधा है।,
यदि अपनी गरिमा को धारण कर पर्वत भी जाते रूट,
कि नदियाँ, झरने, तालाबों के ये सब सूखे-सूखे दिखते रूप।
कि पर्वतों ने अपनी गरिमा और मानवता का त्याग किया,
पर्वत ही तो है, जिसने इन सब में जल का भरण किया है।
पर्वतों की ऊँचाइयों ने धाराओं को थामा है,
गिरती हुई सरिताओं को कठिनाइयों से त्यागा है।
— कुमार विरेंद्र
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7393 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13121 कविताएं

View Profile