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पर्वतों की ऊंचाइयां

                
                                                         
                            पर्वतों की ऊंचाइयां
                                                                 
                            
पर्वतों की ऊँचाइयों ने धाराओं को थामा है,
गिरती हुई सरिताओं को कठिनाइयों से त्यागा है।
सरिताओं की क्या-मलाल की पर्वतों से बैर करे वे,
पर्वत ही तो है, जिसने सरिताओं को प्रेम में बाँधा है।,
यदि अपनी गरिमा को धारण कर पर्वत भी जाते रूट,
कि नदियाँ, झरने, तालाबों के ये सब सूखे-सूखे दिखते रूप।
कि पर्वतों ने अपनी गरिमा और मानवता का त्याग किया,
पर्वत ही तो है, जिसने इन सब में जल का भरण किया है।
पर्वतों की ऊँचाइयों ने धाराओं को थामा है,
गिरती हुई सरिताओं को कठिनाइयों से त्यागा है।
— कुमार विरेंद्र
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एक घंटा पहले

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