बस एक छोटी सी बात कहना चाहता हूं ,
जितना टूटकर मैं संभला हूं ना
अगर तुम होते तो टूटकर बिखर जाते
वो कहते है कि हमें कभी याद नहीं करते ,
उन्हें क्या मालूम
कि हम कभी उन्हें भूले ही नहीं
ओय सुन ,
एक तेरे लिए पूरी लड़की
जात को बदनाम नहीं करूंगा
उसे लगता है
कि मैं गहरी नींद में सोया हूं
उसे क्या मालूम
कि मैं तन्हाइयो में रोया हूं
बदतमीज हूं मैं
मुझसे मोहब्बत करके यूं डफर ना बन
मुझसे भी बदतमीज है मेरा हमसफ़र
तु मेरा हमसफ़र ना बन
जैसे रास्तों का वास्ता
मुसाफिर से होता है
वैसे बेवफाई का वास्ता
आशिक़ी से होता है
वो मेरे दिल से खेलकर हंसते हैं
क्या करूं मोहब्बत के हाथों मजबूर हूं
वो आज भी मेरे दिल में बसते है
मैं हूं बदतमीज हूं आवारा
क्योंकि मैं हूं
किसी की मोहब्बत का मारा
कहना तो बहुत कुछ चाहता था
पर तेरी बातें सुनकर
चुप रहना बेहतर समझा.....
होगा तेरा प्यार एक फरेब
और बिछड़कर रोना एक झूठ
प्यार में बिछड़कर तड़पना और
टूटकर बिखरना मुझसे पूछ
By _ Vipin Dilwarya
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।