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तस्वीर जिंदगी की

Vinod

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बना रहा हूं तस्वीर जिंदगी की
        
                                                    
                            
कुछ रंग भरना अभी बाकी है

किसी से हारना है
किसी से जितना अभी बाकी है
कोई नाराज है हम से दूर हो चूका है
किसी को मनाना है बहुतों को
गले लगाना अभी बाकी है

दौडता हूं जिंदगी के लिए
सिर्फ लगता है ऐसा पर
मौत के लिए बहुत देर तक
तरसना अभी बाकी है

घुटनो के बल बैठा नहीं कभी
मगर जो हो के भी न हो ऐसा
किसी का कुछ कर्ज भी तो
उतारना अभी बाकी है

वक्त के हैं सभी गुलाम यहां पर
उसको जीना है बहुत
जिंदगी को दफन करना
डूब के जीना अभि बाकी है

आखों में सुरज सी रोशनी हैं
मगर बहुत सारा है अंधेरा
संघर्ष में पिघलकर चमकते
उसे मिटाना अभी बाकी हैं

थकतें नहीं पांव चलते चलते
पहाड़ो पें चढ़ना है
लंबा है रास्ता इस सफर को
तय करना अभी बाकी है

खुशियों का रोज
लगता है यहाँ पर मेला
तन्हाइयों के सन्नाटों से
गुजरना अभी बाकी हैं

बेखौफ चलता हूं
रात दिन को मैं सफर पें हूं
पार तो कर लिया दरिया मैंने
मगर समदंर अभी बाकी है

©विनोद गणेशपुरे
एक वर्ष पहले
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