कौन सोचता है, कल के बारे में, आजकल
आज तो आज से निपटना, हो रहा मुश्किल।
सुबह से शाम तक, घेरे रहती हैं, चुनौतियाँ
अब गिरना और संभालना, हो रहा मुश्किल।
-विनोद कुमार "विनय"