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ख़ुद की तलाश में

Vinod H.

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ुद को तलाशते रहता हूँ ...
        
                                                    
                            
पर अफ़सोस ...
क़ाबिल नहीं पाता हूँ...
हारता हूँ मायूस होता हूँ...
फ़िर उठ बैठता हूँ...
चल पड़ता हूँ...

एकबार फ़िर
ख़ुद की तलाश में...

इस बार पाऊँगा...
जरूर ख़ुद को ...
ख़ुदा में छुपे...
मेरे उस वजूद को...
जिससे रोशन ...
मेरा जहाँ है...

तुम्हारा साथ ..
उसी से मिला है...

सिर्फ़ एक ..
गुजारिश है ..
तुमसे...
मेरे तलाश में ..
मत रोकना तुम...
चलूँ गर मैं...
साया बन
साथ रहना तुम...

एकबार फ़िर
ख़ुद की तलाश में...

- विनोद यादव 'शहीद'


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6 वर्ष पहले
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