संघर्ष भरे इस जीवन में तू क्या ही पाएगा, मुझे लगता है तू इस जंगल में भटकता ही रह जाएगा।
तुझे वही मिलेगा जो तेरी किस्मत में लिखा है, भला तू अपनी किस्मत से ज़्यादा क्या ही पा पाएगा।
अगर है हौसला, तो तू आ ही जा मैदान-ए- जंग में, पर तेरी जीत का परचम तू क्या ही लहरा पाएगा।
होकर बेबाक, तू अपनी ही दुनिया में यूँ ही गुम हो जाएगा, ख़ुदा का वास्ता है तुझे, तू न शहर बसा पाएगा, न ही गाँव का रह पाएगा।
जिस बात का डर था, बस वही होकर रह जाएगा, संघर्ष भरे इस जीवन में तू क्या ही पाएगा।