आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संघर्ष पूर्ण जीवन

                
                                                         
                            संघर्ष भरे इस जीवन में तू क्या ही पाएगा, मुझे लगता है तू इस जंगल में भटकता ही रह जाएगा।
                                                                 
                            
तुझे वही मिलेगा जो तेरी किस्मत में लिखा है, भला तू अपनी किस्मत से ज़्यादा क्या ही पा पाएगा।
अगर है हौसला, तो तू आ ही जा मैदान-ए- जंग में, पर तेरी जीत का परचम तू क्या ही लहरा पाएगा।
होकर बेबाक, तू अपनी ही दुनिया में यूँ ही गुम हो जाएगा, ख़ुदा का वास्ता है तुझे, तू न शहर बसा पाएगा, न ही गाँव का रह पाएगा।
जिस बात का डर था, बस वही होकर रह जाएगा, संघर्ष भरे इस जीवन में तू क्या ही पाएगा।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर