'फौजी' तुमसे प्यार है!!
निष्ठुर होते दुनिया कहती,
पछताती जो उनकी गहती;
बस कुछ दिन का सावन होता,
सारी उमर 'पिय' पतझड़ सहती।
लेकिन मैं तो 'उनको' पाकर,
अपने पर इतराती रहती;
मेरे माथे का सेंदुर है,
मेरे गले का हार है,
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।
'फौजी' कहाँ किसी के होते,
न वे हंसते, न वे रोते;
जम्मू से वो जामनगर तक,
बोरिया बिस्तर ढोते रहते।
पर मै कहती भाग हमारे,
सारा देश देखन को मिलता;
इडली डोसा, लिट्टी चोखा,
रोसगुल्ला बंगाली मिलता।
'फौजी' की हमराही बनना,
ईश्वर का उपहार है,
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।
बात-बात पर रौब दिखाते,
बड़े कड़क फौजी होते हैं;
दिल की बात कभी न सुनते,
जिनको मिलते वो रोते हैं।
दिल से कहती सुनो सहेली,
तुमने बस ऊपर से जाना;
दिल बच्चे जैसा होता है,
इस को तुमने न पहचाना।
जिस को तुम पत्थर दिल कहती,
उसमें अनवरत प्यार की धार है।
ईश्वर का उपहार है,
मेरे गले का हार है;
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।
(विनय सिंह बैस 'फौजी')