आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

'फौजी' तुमसे प्यार है

                
                                                         
                            'फौजी' तुमसे प्यार है!!
                                                                 
                            

निष्ठुर होते दुनिया कहती,
पछताती जो उनकी गहती;
बस कुछ दिन का सावन होता,
सारी उमर 'पिय' पतझड़ सहती।

लेकिन मैं तो 'उनको' पाकर,
अपने पर इतराती रहती;
मेरे माथे का सेंदुर है,
मेरे गले का हार है,
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।

'फौजी' कहाँ किसी के होते,
न वे हंसते, न वे रोते;
जम्मू से वो जामनगर तक,
बोरिया बिस्तर ढोते रहते।

पर मै कहती भाग हमारे,
सारा देश देखन को मिलता;
इडली डोसा, लिट्टी चोखा,
रोसगुल्ला बंगाली मिलता।

'फौजी' की हमराही बनना,
ईश्वर का उपहार है,
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।

बात-बात पर रौब दिखाते,
बड़े कड़क फौजी होते हैं;
दिल की बात कभी न सुनते,
जिनको मिलते वो रोते हैं।

दिल से कहती सुनो सहेली,
तुमने बस ऊपर से जाना;
दिल बच्चे जैसा होता है,
इस को तुमने न पहचाना।

जिस को तुम पत्थर दिल कहती,
उसमें अनवरत प्यार की धार है।

ईश्वर का उपहार है,
मेरे गले का हार है;
हां, 'फौजी' तुमसे प्यार है।

(विनय सिंह बैस 'फौजी')
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
52 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर