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एक दुनिया ऐसी हो

Vikram Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो चलें एक सफर को
        
                                                    
                            
जिसका कोई रास्ता ना हो
एक बिंदु से अनंत तक
कहीं खो जाएं
सुदूर रेगिस्तान में
बर्फ के पहाड़ों में
जंगलों में समंदर में
चलो एक दुनिया बनाए
जहां सब शून्य हो
समाज की निर्भरता
समाज की रचना
मानवता से हो
चलो मुक्ति की ओर बढ़ो
हर उस बंधन से मुक्ति
जो बहने से रोक दे
हमें उड़ने से रोक दे
ना डरे कोई किसी से
जहाँ हर कोई कह सके
ये दिन ये रात हमारा है
तुम जियो अपने सपने को
बिना डर के
जीवन ऐसा हो
बस प्रेम हो और कोई वास्ता ना हो
चलो चलें एक सफर को
जिसका कोई रास्ता ना हो
2 वर्ष पहले
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