चलो चलें एक सफर को
जिसका कोई रास्ता ना हो
एक बिंदु से अनंत तक
कहीं खो जाएं
सुदूर रेगिस्तान में
बर्फ के पहाड़ों में
जंगलों में समंदर में
चलो एक दुनिया बनाए
जहां सब शून्य हो
समाज की निर्भरता
समाज की रचना
मानवता से हो
चलो मुक्ति की ओर बढ़ो
हर उस बंधन से मुक्ति
जो बहने से रोक दे
हमें उड़ने से रोक दे
ना डरे कोई किसी से
जहाँ हर कोई कह सके
ये दिन ये रात हमारा है
तुम जियो अपने सपने को
बिना डर के
जीवन ऐसा हो
बस प्रेम हो और कोई वास्ता ना हो
चलो चलें एक सफर को
जिसका कोई रास्ता ना हो
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