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मोहब्बत का बाज़ार

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसे नफ़रत का शोर मचाने दो,
        
                                                    
                            
हम मोहब्बत का बाज़ार लगाए बैठे हैं।

उसे हमें नज़रों से गिराने दो,
हम उसकी एक झलक के इंतज़ार में सदियाँ बिताए बैठे हैं।

वो चाहे हर मोड़ पर हमें ठुकराता रहे,
हम हर मोड़ पर उसकी राह सजाए बैठे हैं।

उसे यक़ीं है कि बदल जाएगा हमारा दिल,
हम उम्रभर की वफ़ा का इकरार किए बैठे हैं।

वो गैरों की महफ़िल में हमें भूल भी जाए,
हम उसके नाम से अपनी हर शाम सजाए बैठे हैं।

उसने नफ़रत को अपना उसूल बना लिया,
हम मोहब्बत को अपना ईमान बनाए बैठे हैं।

वो हमें हार की कहानी समझता रहा,
हम उसकी हर जीत पर भी मुस्कुराए बैठे हैं।

कौन कहता है इश्क़ का कोई बाज़ार नहीं होता,
हम अपना दिल बिना किसी मोल लगाए बैठे हैं।

जिस दिन उसे एहसास होगा हमारी चाहत का,
शायद तब तक हम ख़ामोशियों को गले लगाए बैठे होंगे।

अगर मोहब्बत गुनाह है, तो ये गुनाह बार-बार करेंगे,
क्योंकि हम इश्क़ में अपनी पूरी दुनिया लुटाए बैठे हैं।
- विकास त्रिपाठी 'विक्की'
2 महीने पहले
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