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मिजाज कलम का

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर किसी के बस की बात नहीं,
        
                                                    
                            
कलम से ज़माने का मिज़ाज लिखना।

जो झूठ के दरबार में भी,
सच को बेख़ौफ़ आवाज़ लिखना।

स्याही अगर ईमान से मिल जाए,
तो हर लफ़्ज़ इंक़लाब बन जाता है।

कलम उसी की अमर होती है,
जो इंसान को इंसान लिखना जानता है।

 
2 महीने पहले
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