विज्ञापन

उसकी याद आ रही है, याद फिर से मिटा दो

Vikas Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            साकी,आज फिर से शराब पिला दो
        
                                                    
                            
उसकी याद आ रही है, याद फिर से मिटा दो

साकी, उसे भूलने का कोई दूसरी तरकीब बता दो
या फ़िर, इस ज़ाम में ज़रा सा ज़हर मिला दो

साकी, अभी शराब को सामने से हटा दो
क्या वो भी इस मयखाने में आती है बस इतना बता दो

साकी, मै शराबी नहीं फिर भी आज पिला दो
अगर वो इस मयखाने में आये तो उसे मेरा खाली पैमाना दिखा दो

साकी, मै शराब को हाथ भी ना लगाउंगा
अगर तुम उसकी नज़रों की एक तस्वीर लगा दो


 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile