इस हसरत से भीड़ को देखा, शायद कुछ इंसान दिखें
पर हाथ लगी निराशा मुझको , भीड़ में जब हैवान दिखें
मेरी आँखें देख सकीं ना,दरसल भीड़ भेड़ियों की थी,
जाति -धरम के नाम लिये ।
इन्सानो की बस्ती जलती इनके किए कुकर्मों से ,
इनके मुख पर खून लगे है जाति जाति-धर्म के दंगों से ।
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