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भरत तिवारी एनकाउंटर कविता

Vikas Upadhyay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्रांतिकारियों से सत्ता की, न जाने क्या रंजिश है?
        
                                                    
                            
सत्ता ही बतलाए, उसकी क्या मंशा क्या ख्वाहिश है?
सिर्फ पुलिस का दोष नहीं है, सत्ता भी शामिल इसमें 
भरत तिवारी एनकाउंटर, सोची समझी साजिश है

नन्हा सा इक पौध कुचलकर, तुमने शजर किया है
जनता ने भी गौर किया है, तुम पर नज़र किया है
भरत तिवारी के मुद्दे पर, पुलिस प्रशासन ध्यान रहे
एनकाउंटर कहकर तुमने, उसका मर्डर किया है
-विकास उपाध्याय 'वैभव'
 
एक महीने पहले
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