जीवन में सुखाधार ---
क्षण भंगुर जीवन में सुखी रहने का एक रास्ता है,
प्राप्त वही पर्याप्त लगन और मेहनत से वास्ता है
तन मन श्रम से जो भी प्राप्त हो उसमें सुख पायें,
प्रगतिशील पथ पर हमेशा ही आगे बढ़ते जायें
ऐसी दिनचर्या से जीवन सुख समृद्ध हो जाता है,
कष्ट दूर भाग जाता सुख दौड़ कर आ जाता है
जीवन में हम प्राप्त की कीमत कम कर देते हैं
तब सुख को दूरकर जीवन को दुखद कर लेते हैं
हम मानव जीवन पाके बडे ही सौभाग्यशाली हैं
निरोगी तन पाके हम परम सौभाग्यशाली हैं
जीवन में अच्छी सोच से हम सुखी रह सकते हैं
जीवन में खोटी सोच से हम कष्ट सह सकते हैं
जग में सब नश्वर कुछ भी साथ नहीं जाएगा
जिसको हम अपना कहते वह साथ नहीं जाएगा
जब हम जग में आए तब कुछ भी साथ न लाये
सब कुछ यहीं पाये और सब कुछ यहीं गंवाये
फिर न जाने क्यों पद प्रतिष्ठा में खोये रहते हैं
इंसानियत भूलके नफरत में ही खोये रहते थे
जग के प्राणी जीवन की यात्रा के सहगामी हैं
एक दूसरे के सहयोगी पूरक एवम अनुगामी हैं
हम सभी प्राणियों से ईर्ष्या घृणा करना छोड़ दें
प्राप्त को ही पर्याप्त समझकर नित नव मोड़ दें
ऐसा करके हम निज जीवन स्वर्ग बना सकते हैं
छल कपट रहित जीवन में फिर सुख पा सकते हैं
-बीपी सिंह यादव