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आदमी को ढूंढता आदमी

VIJAY RASTOGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना जाने कहाँ खो गया दुनियाँ मे आदमी।
        
                                                    
                            
कि आदमी को ढूंढता है यहाँ आदमी ।।
दुनियाँ की भीड़ में भी तन्हाँ घूमता है ।
मतलब से ही हाथ मिलाता है आदमी ।।
क्या बो दिया था ऐसा जो ये फसलें उग गई ।
के आदमी को काटता है यहाँ आदमी ।।
जो कहते थे हम ढूंढ के लायेंगे आदमी ।
बन ना सके पहले वो खुद ही आदमी।।
~ विजय रस्तोगी
2 महीने पहले
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