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15 August special सियाचिन:अनसुने अफ़सानों की शौर्य गाथा

Vidhi Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हकीकत से दूर कुछ अनसुने फ़साने हैं,
        
                                                    
                            
जहाँ न ग़म,न हँसी,न ही प्यार के तराने हैं।
बस मौन में सिमटे कर्तव्य के अफ़साने हैं।
खूबसूरत प्रकृति की खामोशी में कुछ अनकहे अफ़साने हैं।

यह कहानी है विश्व के सबसे ऊँचे रणक्षेत्र सियाचिन के रणबांकुरों की,
जहाँ माइनस पचास डिग्री से भी नीचे तापमान में रहते राष्ट्र के वीरों की।
बर्फीले तूफ़ानों में जिन्होंने दी अपनी कुर्बानी है,
उन जाबाज़ों की साहसी वीरगाथा आज की कहानी है।

चारों ओर बर्फ की सफ़ेद चादर से लिपटी दीवारें हैं,
न नींद ,न भूख-ऑक्सीजन को तरसती साँसों की बेबस पुकारें हैं ।
सूरज की किरणों में चमकती बर्फ उनकी आँखों की रोशनी चुरा ले जाती है,
हर परिस्थिति में डटे रहना ही उन वीरों की असली निशानी है ।

जहाँ हर जवान के पांव में बँधी एक मज़बूत रस्सी है,
न जाने कब पर्वत की गोद उसे अपने आगोश में समेट ले—
यह प्रकृति की खामोश हँसी है।
सर्द हवा की लहरें धड़कनों को थाम लेती हैं,
मगर मौत से आँख मिलाना शूरवीरों की आदत पुरानी है ।

बर्फीली घाटियों में फूलों से ज़्यादा कठिनाइयों के काँटे हैं,
महीनों परिवार के रंगों से दूर वीर उदासी अपनाते हैं ।
हर रोज़ नई बीमारियाँ दस्तक देती हैं,हर पल उन्हें आज़माती हैं,
पर वे वीर योद्धा देश के खातिर हँसकर हर पीड़ा सह जाते हैं।

उन वीर माताओं के जज़्बे को शत-शत नमन हम करते हैं,
जो मुस्कुराते हुए अपने बच्चों को मौत के साए में भेजते हैं।
शौर्य, पराक्रम और बलिदान की अमर गाथाएँ ये रचते हैं,
हँसते-हँसते अपने दिल के टुकड़ों को देश को अर्पित करते हैं ।

जो हिमशिखरों पर डटे हैं, तभी सुरक्षित हमारा घर-आँगन है,
उनके चरणों में समर्पित यह विनम्र काव्यांजलि, यही हमारा वंदन है।
-वन्दना सूद
2 दिन पहले
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