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ये वक़्त भी यूँ ही गुजर जाएगा!

Vibhor Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त के साथ वो ओर हसीन होते चले गए,
        
                                                    
                            
उनकी चमक बढ़ती रही,
हम बदरंग होते चले गए 'विभोर'।

बरसों बाद जो देखा उन्हें, होश खो बैठे,
नजरें तलाशती रहीं,
जब तक वो ओझल न हो गए!

माना कि पास नहीं रहेंगे वो अब हमारे,
इस दिल को कैसे समझाएँ 'विभोर'?
नादान परिंदा है,
उड़कर वहीं पहुँच जाता है।

नादान है, समझ जाएगा, संभल जाएगा,
एक दिन नजरों की तरह ये भी ओझल हो जाएगा।
शांत हो जाएगा सब कुछ 'विभोर',
ये वक़्त भी यूँ ही गुजर जाएगा!
2 घंटे पहले
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