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ये वक़्त भी यूँ ही गुजर जाएगा!

                
                                                         
                            वक्त के साथ वो ओर हसीन होते चले गए,
                                                                 
                            
उनकी चमक बढ़ती रही,
हम बदरंग होते चले गए 'विभोर'।

बरसों बाद जो देखा उन्हें, होश खो बैठे,
नजरें तलाशती रहीं,
जब तक वो ओझल न हो गए!

माना कि पास नहीं रहेंगे वो अब हमारे,
इस दिल को कैसे समझाएँ 'विभोर'?
नादान परिंदा है,
उड़कर वहीं पहुँच जाता है।

नादान है, समझ जाएगा, संभल जाएगा,
एक दिन नजरों की तरह ये भी ओझल हो जाएगा।
शांत हो जाएगा सब कुछ 'विभोर',
ये वक़्त भी यूँ ही गुजर जाएगा!
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45 मिनट पहले

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